कुछ दिन के वीजा पे, आये हो तुम भ्रमण में ।
मुस्कुराते यादों के सिवा, रखा क्या है जीवन में।
अगर कुछ लगता है, तो सब भ्रम है
क्योंकि वापसी टिकट तो कन्फर्म है।
तुम्हारा नाम जीवित रहे, कुछ ऐसा किये जा
इस भीड़ को अपनी पहचान दिये जा
ये तेरा-ये मेरा, ये सब इंसान का वहम है।
क्योंकि वापसी टिकट तो कन्फर्म है।
तुम हो जो काबिल तो दूसरे को उठाते चलो
बेवजह भी लोगों को गले लगाते चलो
नि:स्वार्थ सेवा ही मानवता का कर्म है।
क्योंकि वापसी टिकट तो कन्फर्म है।
अपनी गलतियाँ दूसरे पर ना मढा करो
गिरते को सहारे देते हुए आगे बढा करों
खुद को बदलो क्योंकि वक्त कम है।
क्योंकि वापसी टिकट तो कंफर्म है।
# अमित राजन
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