Saturday, 16 January 2021

शिक्षित बनो

"वजह अनंत है, असफलता को मजबूरी का नाम देना।
इतिहास लेकिन कब सीधे रास्तों की लिखी गयी है।"
       हर व्यक्ति का कुछ न कुछ सपना होता है। कुछ उसे हासिल कर लेते हैं और कुछ परिस्थितियों का हवाला देते हुए अपने अरमानों को दफ्न कर देते हैं। ज्यादातर मामलों में गरीबी और पिछड़ापन बड़ा कारण रहा है। ऐसे में प्रश्न यह उठता है कि क्या कोई ब्राह्मस्त्र ऐसा है, जो अत्यंत दबे-कुचले, पिछड़े लोगों के जीवन में नया सूर्योदय ला सके।
     इसे कुछ उदाहरणों के रूप में देखते हैं- "थोड़ी देर के लिए मान लेते कि डॉ॰ भीम राव अम्बेडकर शिक्षित नहीं होते" आप सोचिए फिर वर्तमान स्थिति कैसी होती। उन दिनों अंग्रेजों का राज था और जाति व पिछड़ेपन पर अत्याचार का बोलबाला था। वैसी परिस्थिति से अम्बेडकर साहब आगे आएं। और अपनी शिक्षित होने का सबसे बेहतर उपहार उन्होंने अपने समाज और उनके जैसे दबे-कुचले वर्गों को दिया, जिसके कारण आज बहुत हद तक भेदभाव से ग्रासित समाज उन्नति की ओर अग्रसर हो सका है।
   मैंने एक खबर पढ़ी जिसमें एक ट्रांसजेडर डॉक्टर बनी, जो देश की पहली ट्रांसजेंडर डाॅक्टर है। किसी भी ट्रांसजेंडर के जीवन में कष्ट और चुनौतियां ठूस-ठूसकर भरी रहती है। कोई उन्हें सम्मान नहीं देता। लेकिन आज अगर वह डॉ॰ या कुछ अन्य ट्रांसजेंडर जज, विधायक, न्यूज एंकर आदि है, वह अपने बुद्धि व शिक्षित होने के कारण ही सम्मानित हो रहे हैं।
    अनगिनत उदाहरण हमसभी के आसपास मिल जाएगा, जिसमें व्यक्ति कभी बहुत गरीब रहा होगा लेकिन जब वह मेहनत करके नौकरी हासिल कर लेता है तब उसका व उसके परिवार का जीवन ही बदल जाता है। मतलब कि शिक्षा एक ऐसा हथियार है जिसका उपयोग कर आप अपना वर्तमान व भविष्य बदल सकते हैं।
    आज गाँव में देखें तो जात पात चरम सीमा पर दिखता है; लेकिन जब उसी गाँव के पढ़े लिखे बच्चें बाहर में नौकरी करते हैं और बिना जात पात देखे अपनी ही कंपनी में कार्यरत कर्मचारी से विवाह कर लेते हैं और थोड़ी अनबन के बाद उनके माता-पिता भी इसे स्वीकार कर लेते हैं, उस समय जात-पात निगण्य हो जाती है।
      इसका सीधा एक मतलब निकलता है कि शिक्षा से ही सामाजिक बुराईयों को मिटाया जा सकता हैं। इसलिए किसी भी वर्ग के लिए यह आवश्यक है कि अगर वे अपना उत्थान चाहते हैं तो शिक्षित बनें और अपने आसपास के लोगों को भी शिक्षित करें। तभी एक बेहतर व सशक्त समाज के साथ समृद्ध भारत का निर्माण संभव है।
                         🖊: अमित राजन चंद्रवंशी

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