Wednesday, 10 August 2022

चाचा पलटू

कुछ कहते मुझे विकास बाबू
कुछ कहते हैं चाचा पलटू
हमरी तो खासियत है यही
तु जलता है तो जल तू

शरीफ हो या भ्रष्टाचारी
हम मिलके रहते हैं सबसे
जाँच कमिटियाँ बैठा दूंगा
जो रखेगा दुश्मनी हमसे
हवा बनाना खूब है आता
इसी हवा में चल तू
कुछ कहते सुशासन बाबू
कुछ कहते हैं चाचा पलटू....

भाईयों-बहनों कहकर जिसने ठगा 
उसको भी हमने कहाँ छोड़ा
ये राजनीति है बिहार वासियों
दौड़ता हुआ बेलगाम घोड़ा
राज करेगा जद यूं ही
बिज पर चाहे पल तू
कुछ कहते मुन्ना भाई
कुछ कहते हैं चाचा पलटू

तुम ना समझोगे भावना
हमरी तो सबसे यारी है
कोई चाहे जो कहे 
हमें तो बस कुर्सी प्यारी
विपक्षी पिटे अब काहे छाती
आगाह किया था कि संभाल तू
कुछ कहते कुर्सी कुमार
कुछ कहते हैं चाचा पलटू।

यह कविता हास्य व काल्पनिक है।

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